कुछ पसंदीदा कविताए। इधर-ऊधर Internet से उठाई हुई
सबसे खतरनाक होता है...
सबसे खतरनाक होता है ,
बेजान शांति से भर जाना,
न होना तडफ का,
सब सहन कर जाना ,
घर से निकलना काम पर,
और काम से लौटकर घर आना
सबसे खतरनाक होता है ,
हमारे सपनों का मर जाना.
-- .पाश
वैसे आजाद नहीं हैं हम
जैसे तुम सोच रहे साथी, वैसे आजाद नहीं हैं हम,
जैसे तुम सोच रहे साथी, वैसे आजाद नहीं हैं हम।
पिंजरे जैसी इस दुनिया में, पंछी जैसा ही रहना है,
भर पेट मिले दाना-पानी, लेकिन मन ही मन दहना है,
जैसे तुम सोच रहे साथी, वैसे संवाद नहीं हैं हम,
जैसे तुम सोच रहे साथी, वैसे आजाद नहीं हैं हम।
आगे बढ़नें की कोशिश में, रिश्ते-नाते सब छूट गये,
तन को जितना गढ़ना चाहा, मन से उतना ही टूट गये,
जैसे तुम सोच रहे साथी, वैसे आबाद नहीं हैं हम,
जैसे तुम सोच रहे साथी, वैसे आजाद नहीं हैं हम।
पलकों ने लौटाये सपने, आंखे बोली अब मत आना,
आना ही तो सच में आना, आकर फिर लौट नहीं जाना,
जितना तुम सोच रहे साथी, उतना बरबाद नहीं हैं हम,
जैसे तुम सोच रहे साथी, वैसे आजाद नहीं हैं हम।
आओ भी साथ चलें हम-तुम, मिल-जुल कर ढूंढें राह नई,
संघर्ष भरा पथ है तो क्या, है संग हमारे चाह नई
जैसी तुम सोच रहे साथी, वैसी फरियाद नहीं हैं हम,
जैसे तुम सोच रहे साथी, वैसे आजाद नहीं हैं हम।
--- विनोद श्रीवास्तव
कहाँ से उठाई ? यहाँ से...
http://hindini.com/hindini/?p=14
http://fursatiya.blogspot.com/2005/04/blog-post_15.html
http://akshargram.com/nirantar/0605/kavita

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